Used Car Loan Tips: Dealer Finance से बचें, लाखों बचाएं; जानिए पूरा प्रोसेस


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यूज्ड कार खरीदना समझदारी है, लेकिन डीलर फाइनेंस आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है. हाई इंटरेस्ट, हिडेन चार्ज और महंगी EMI से बचने के आसान तरीके जानिए. इस गाइड में हम बताएंगे कैसे बैंक से सस्ता लोन लेकर आप हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये बचा सकते हैं. अगर आप सेकंड-हैंड कार लेने की सोच रहे हैं, तो ये जानकारी आपके बहुत काम आएगी.

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बैंक से सीधा संपर्क कर बेहद कम ब्याज पर ऐसे पास कराएं 'यूज्ड कार लोन'Zoom

पुरानी कार खरीदते समय ये टिप्स जरूर फॉलो करें.

Used Car Loan: मौजूदा समय में पुरानी या यूज्ड कार खरीदना नई कार से ज्यादा स्मार्ट विकल्प बन गया है. कम कीमत, कम डेप्रिशिएशन और तुरंत उपलब्धता के कारण कई लोग सेकंड-हैंड कार की ओर रुख कर रहे हैं. लेकिन खरीदारी के समय सबसे बड़ा जाल डीलर का फाइनेंस होता है.

डीलर अक्सर हाई ब्याज दर, छिपे चार्ज और कम्फर्ट के नाम पर महंगा लोन थोप देते हैं, जिससे कुल लागत बहुत बढ़ जाती है. जबकि अपने बैंक या NBFC से सीधा यूज्ड कार लोन लेने पर ब्याज दर काफी कम हो सकती है. इससे आप लाखों रुपये बचा सकते हैं. इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि डीलर फाइनेंस से कैसे बचें और बैंक लोन कैसे आसानी से पास कराएं.

डीलर फाइनेंस से क्यों बचें?

डीलर फाइनेंस की सबसे बड़ी समस्या ये है कि ये सुविधाजनक लगता है, लेकिन महंगा पड़ता है. डीलर लोन में ब्याज दर अक्सर 12% से 18% या उससे ज्यादा हो सकती है. इसमें डीलर को कमीशन भी जुड़ जाता है, जिसे वे ब्याज में छिपा देते हैं. कई बार प्रोसेसिंग फीस, इंश्योरेंस और अन्य चार्जेस भी अनावश्यक रूप से बढ़ा दिए जाते हैं. नतीजा? आपकी EMI कम दिखती है लेकिन कुल चुकौती राशि बहुत ज्यादा हो जाती है.

बैंक लोन क्यों बेहतर?

बैंक या फाइनेंशियल संस्थानों से सीधा यूज्ड कार लोन लेने पर ब्याज दर आमतौर पर 9.5% से 15% के बीच रहती है. उदाहरण के लिए, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में यूज्ड कार लोन 9.45% से शुरू होता है, जबकि SBI में 10.45% से 15.60% तक. HDFC और ICICI जैसे प्राइवेट बैंक भी 11% से 14% के आसपास कंपीटीटिव रेट दे देते हैं. अच्छा CIBIL स्कोर (750+) होने पर दरें और कम हो सकती हैं. बैंक लोन में शर्तें पारदर्शी होती हैं, कोई हिडेन चार्ज नहीं और फोरक्लोजर या पार्ट-पेमेंट पर भी आसानी मिलती है.

कैसे मिलेगा अप्रूवल?

यूज्ड कार लोन के फायदे कई हैं. सबसे पहले, लोन अमाउंट कम होता है क्योंकि कार की कीमत नई से 30-50% कम होती है. इससे EMI का बोझ भी कम रहता है. बैंक आमतौर पर कार की वैल्यूएशन के 80-90% तक फाइनेंस कर देते हैं. टेन्योर 5 से 7 साल तक मिल सकता है, जिससे मासिक किस्त आसान हो जाती है. इसके अलावा, अगर आपकी सैलरी अच्छी है या क्रेडिट हिस्ट्री क्लीन है, तो बैंक जल्दी अप्रूवल देते हैं.

डीलर फाइनेंस से बचने के लिए कुछ जरूरी टिप्स-

  • प्री-अप्रूवल लें: कार देखने से पहले अपने बैंक से प्री-अप्रूव्ड लोन लेटर ले लें. इससे डीलर पर प्रेशर बनता है और आप बेहतर डील नेगोशिएट कर सकते हैं.
  • मल्टीपल बैंकों से कंपेयर करें: SBI, PNB, HDFC, Axis, Bank of Baroda आदि की वेबसाइट या ऐप पर रेट्स चेक करें. ऑनलाइन लोन कंपेयर पोर्टल जैसे BankBazaar या Paisabazaar का इस्तेमाल करें.
  • CIBIL स्कोर सुधारें: अच्छा क्रेडिट स्कोर कम ब्याज दर का सबसे बड़ा हथियार है.
  • डॉक्यूमेंट तैयार करें: सैलरी स्लिप, ITR, बैंक स्टेटमेंट, कार के पेपर (RC, इंश्योरेंस, PUC) और सेलर की KYC जरूरी होते हैं.
  • वैल्यूएशन चेक कराएं: कार की सही वैल्यू पता करने के लिए इंडिपेंडेंट वैल्यूएटर या ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर से चेक कराएं. इससे लोन अमाउंट सही मिलेगा.

प्रक्रिया काफी सरल है. बैंक की ब्रांच या ऑनलाइन अप्लाई करें. वे कार की इंस्पेक्शन कराते हैं, डॉक्यूमेंट्स वेरिफाई करते हैं और कुछ दिनों में लोन डिस्बर्स कर देते हैं. पैसा सीधे सेलर के अकाउंट में जाता है.

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Ram Mohan MishraSenior Sub Editor

न्यूज़18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के रूप में कार्यरत राम मोहन मिश्र 2021 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और फिलहाल ऑटो डेस्क संभाल रहे हैं. वे कार और बाइक से जुड़ी जानकारी को आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से …और पढ़ें





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