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Tata Motors ने रचा इतिहास: 10 लाखवां कमर्शियल व्हीकल रोल आउट, जानें पूरी कहानी

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On April 15, 2026
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एक ट्रक से शुरू हुआ Tata Motors का सफर आज 10 लाख कमर्शियल व्हीकल तक पहुंच गया है. 1954 में पहले ट्रक से लेकर आज के आधुनिक CV पोर्टफोलियो तक, कंपनी ने भारतीय ट्रांसपोर्ट सेक्टर को नई दिशा दी है. आखिर कैसे Tata Motors ने दशकों में ये मुकाम हासिल किया और क्या है इसकी पूरी कहानी, जानने के लिए पढ़ें ये खास रिपोर्ट.

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एक 'खटारा' ट्रक से शुरू हुआ सफर, 10 लाखवें कमर्शियल व्हीकल तक पहुंचा!Zoom

Tata Motors ने अपना 10 लाखवां कमर्शियल व्हीकल रोल-आउट किया है.

Tata Motors का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है. 1945 में Tata Engineering and Locomotive Company के रूप में शुरुआत करने वाली इस कंपनी ने 1954 में Daimler-Benz के साथ मिलकर देश में कमर्शियल व्हीकल इंडस्ट्री की मजबूत नींव रखी. पहले स्वदेशी हेवी-ड्यूटी ट्रक से शुरू हुआ ये सफर आज एक ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंच चुका है.

समय के साथ इनोवेशन और विस्तार की राह पर आगे बढ़ते हुए कंपनी ने अब अपना 10 लाखवां कमर्शियल व्हीकल रोल आउट कर दिया है. ये एक ऐसी उपलब्धि है, जो इसके दशकों लंबे विकास और भारत की प्रगति की कहानी को बयां करती है. आइए टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल वाले बिजिनेस की आदि से लेकर अब तक की कहानी पर एक सरसरी नज़र डालते हैं.

1954 में हुई शुरुआत

Tata Motors की कमर्शियल व्हीकल (CV) जर्नी काफी उतार-चढ़ाव से भरी रही है. 1945 में टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (TELCO) के रूप में स्थापित ये कंपनी शुरू में लोकोमोटिव और इंजीनियरिंग उत्पादों पर केंद्रित थी. स्थापना के लगभग 9 साल बाद 1954 में जर्मनी की Daimler-Benz के साथ तकनीकी सहयोग ने इसके भाग्य बदल दिए.

उसी वर्ष 15 अक्टूबर को जमशेदपुर प्लांट से पहला Tata Mercedes-Benz ट्रक (TMB 312 मॉडल) रोल आउट हुआ. ये 3-5 टन क्षमता का 90-100 HP वाला गुड्स कैरियर चेसिस था, जो भारतीय सड़कों पर हैवी ड्यूटी ट्रक का प्रतीक बन गया. ये भारत में निर्मित पहला हेवी-ड्यूटी ट्रक था, जिसने देश की ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स को नई दिशा दी.

1970 में बने सेल्फ डिपेंडेंट!

1969 तक Daimler-Benz के साथ काम चला, जिसके बाद वाहन पूर्ण रूप से Tata ब्रांड के तहत बने. कंपनी ने धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाई. 1970 के दशक में पुणे प्लांट की स्थापना हुई, जहां मीडियम और हैवी कमर्शियल व्हीकल्स का प्रोडक्शन शुरू हुआ. 1986 में लॉन्च हुआ Tata 407 लाइट कमर्शियल व्हीकल (LCV) ने बाजार में क्रांति ला दी. ये मल्टीपर्पज, किफायती और विश्वसनीय ट्रक छोटे व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ. Tata 407 ने इंडो-जापानी प्रतियोगियों को टक्कर दी और कंपनी को LCV सेगमेंट में मजबूत पकड़ दिलाई.

Tata Ace बना गेम चेंजर

2000 के दशक में Tata Motors ने विस्तार किया. 2005 में Tata Ace लॉन्च हुआ, जो भारत का पहला मिनी ट्रक था. ये छोटे शहरों और लास्ट माइल डिलीवरी के लिए परफेक्ट साबित हुआ और छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाया. कंपनी ने इंटरनेशनल बाजार में कदम रखा. 2004 में दक्षिण कोरिया की Daewoo Commercial Vehicles का अधिग्रहण किया. साथ ही इलेक्ट्रिक और सीएनजी जैसे ग्रीन व्हीकल्स पर फोकस बढ़ाया. आज Tata Motors के पास लाइट, इंटरमीडिएट, मीडियम और हेवी ट्रक्स, बसें, टिपर्स और इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यापक रेंज है.

पार किया बड़ा माइलस्टोन

कंपनी ने अपनी इस लंबी यात्रा का नया अध्याय 15 अप्रैल 2026 को लिखा गया, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ प्लांट से Tata Motors का 10 लाखवां कमर्शियल व्हीकल रोल आउट किया. 1992 में स्थापित ये 600 एकड़ का प्लांट कार्गो, पैसेंजर, इलेक्ट्रिक बसों और ग्रीन मोबिलिटी सॉल्यूशंस का सेंटर है. ये माइलस्टोन कंपनी की 70+ वर्षों की मेहनत,इनोवेशन और भारत की आर्थिक प्रगति में योगदान को दर्शाता है.

About the Author

Ram Mohan MishraSenior Sub Editor

न्यूज़18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के रूप में कार्यरत राम मोहन मिश्र 2021 से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और फिलहाल ऑटो डेस्क संभाल रहे हैं. वे कार और बाइक से जुड़ी जानकारी को आसान, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से …और पढ़ें



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Satish Kumar एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और न्यूज़ पब्लिशर हैं। ये Sarkari Yojana, Technology News और Automobile Updates पर लेख लिखते हैं। इनके लेखों का उद्देश्य लोगों को सही और तेज जानकारी देना है।