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केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक और वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले कमर्शियल वाहनों को बड़ी राहत दी है. सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) के लिए परमिट छूट की अवधि एक साल और बढ़ा दी है. साथ ही अब एथेनॉल, मेथेनॉल और हाइड्रोजन से चलने वाले कमर्शियल वाहन भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे. हालांकि, यह छूट निजी कार मालिकों के लिए नहीं है.
अगर आपके पास निजी इस्तेमाल की इलेक्ट्रिक या दूसरी कार है तो इस फैसले से आपके नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा. (AI)
नई दिल्ली. अगर आप इलेक्ट्रिक टैक्सी, बस, ट्रक या दूसरे कमर्शियल वाहन चलाते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. केंद्र सरकार ने ऐसे वाहनों के लिए लागू परमिट छूट को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है. इतना ही नहीं, अब यह सुविधा सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहनों तक सीमित नहीं रहेगी. एथेनॉल, मेथेनॉल और हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले कमर्शियल वाहनों को भी इसका फायदा मिलेगा. सरकार का मानना है कि अगर कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिए नियम आसान बनाए जाएंगे तो लोग तेजी से इन्हें अपनाएंगे. इससे परिवहन क्षेत्र में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल बढ़ेगा और परिचालन लागत भी कम होगी.
देश में कई तरह के कमर्शियल वाहनों को अलग अलग राज्यों में संचालन के लिए नेशनल परमिट या ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की जरूरत होती है. इन परमिट के लिए आवेदन, दस्तावेज और फीस जैसी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं. सरकार ने ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक और अब अन्य वैकल्पिक ईंधन वाले कमर्शियल वाहनों को इन परमिट की अनिवार्यता से छूट दी है. यानी इन वाहनों के ऑपरेटरों को कई मामलों में परमिट लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी.
किन वाहनों को मिलेगा फायदा?
सरकार के नए फैसले के तहत इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के अलावा एथेनॉल, मेथेनॉल और हाइड्रोजन से चलने वाले कमर्शियल यात्री वाहन और माल ढोने वाले वाहन भी इस छूट के दायरे में आएंगे. इसका फायदा टैक्सी ऑपरेटर, बस कंपनियां, लॉजिस्टिक्स कंपनियां, ट्रांसपोर्टर और मालवाहक वाहनों के मालिकों को मिल सकता है.
क्या आपकी निजी कार भी बिना परमिट चल सकेगी?
अगर आपके पास निजी इस्तेमाल की इलेक्ट्रिक या दूसरी कार है तो इस फैसले से आपके नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा. दरअसल, यह छूट केवल कमर्शियल उपयोग वाले वाहनों के लिए है. निजी कारों को पहले भी इस तरह के कमर्शियल परमिट की जरूरत नहीं होती, इसलिए इस फैसले का उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
सरकार का मकसद क्या है?
सरकार पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दे रही है. इसका उद्देश्य पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है. सरकार का मानना है कि अगर परमिट जैसी प्रक्रियाएं आसान होंगी तो ट्रांसपोर्ट कंपनियां इलेक्ट्रिक, एथेनॉल, मेथेनॉल और हाइड्रोजन आधारित वाहनों को तेजी से अपनाएंगी. इससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर की लागत कम हो सकती है और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा.
कब तक मिलेगी यह छूट?
सरकार ने इस परमिट छूट की अवधि को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है. यानी फिलहाल यह व्यवस्था जुलाई 2027 तक लागू रहेगी. इस दौरान पात्र कमर्शियल वाहन बिना संबंधित परमिट लिए भी निर्धारित नियमों के तहत संचालन कर सकेंगे.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें