फिल्म शोले तो आपने जरूर देखी होगी. इस मशहूर फिल्म एक बहुत फेमस गाना था ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’, इस दिखाई देने वाली 1942 मॉडल की आइकॉनिक BSA WM20 मोटरसाइकिल एक बार फिर चर्चा में है. रमणागरा की पहाड़ियों में धूल उड़ा चुकी यह विंटेज बाइक अब गोवा में चल रहे इंटरनैशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया ( IFFI – 2025 ) में लोगों का ध्यान खींच रही है.

कर्नाटक की सूचना और जनसंपर्क विभाग (DIPR) ने इस 83 साल पुरानी बाइक को खास तौर पर प्रदर्शित किया है. सोमवार को अभिनेता धर्मेंद्र के निधन के बाद, यह बाइक उनके दौर और उनकी मोहक अदाओं की एक दर्दभरी याद भी बन गई है.

अब आप ये सोच रहे होंगे कि क्या ये बाइक अभी भी चलती है. टाइम्स ऑफ इंडिया कि रिपोर्ट के अनुसार, DIPR के कमिश्नर और ADGP हेमंत निंबालकर ने बताया कि शोले के 50 साल पूरे होने पर ऐसी यादगार ‘चीज दिखाने की इच्छा थी, जो लोगों को तुरंत फिल्म की दुनिया में ले जाए.

उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग यही बेंगलुरु के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एल.के. अतीक, जो बेंगलुरु बिजनेस कॉरिडोर के चेयरपर्सन भी रह चुके है, उन्होंने इसे करीब तीन साल पहले खरीदा था.ये असली BSA बाइक मूल रूप से कर्नाटक के एक परिवार की विरासत थी, जो दादा से पोते तक चली.

शोले फिल्म की मशहूर जय-वीरू वाली बाइक असल में 1942 की BSA WM20 है. ये ब्रिटिश कंपनी बर्मिंघम स्मॉल आर्म्स की बनाई हुई मिलिट्री बाइक है, जो सेकेंड विश्व युद्ध में ब्रिटिश आर्मी के लिए लाखों की संख्या में बनी थी. शोले में इस्तेमाल हुई बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर MYB 3047 है, चेसिस नंबर M20 116283 और इंजन नंबर M20 4299 है.

फीचर्स की बात करें तो इसमें 500 सीसी का सिंगल सिलेंडर साइड-वॉल्व इंजन लगा था, जो 12.5 हॉर्सपावर देता था. इसकी टॉप स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा थी, लेकिन आर्मी यूज में 55-60 किमी/घंटा पर बेस्ट चलती थी.

1942 में ब्रिटिश आर्मी को ये बाइक करीब 50 से 60 पाउंड में मिलती थी, जो उस समय के हिसाब से लगभग 700 से 800 भारतीय रुपये होती थी.<br />इसका वजन 170 किलो, फ्यूल टैंक 13 लीटर का है. फ्रंट में गर्डर फोर्क्स और रियर में बड़ा कैरियर लगा था. ब्रेक्स दोनों तरफ ड्रम थे जिनमें युद्ध की वजह से रबर कम था, इसलिए हैंडल ग्रिप और फुटरेस्ट कैनवास से ढके मेटल के थे.