टेस्‍ला का दावा- हमारी कार खरीदकर 20 लाख रुपये बचा लेंगे भारतीय ग्राहक, लॉन्चिंग के बाद से चीनी कंपनी से मिल रही टक्‍कर

नई दिल्‍ली. दुनिया के सबसे अमीर और सफल आदमी एलन मस्‍क के सपने भारत में आकर बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं. उनकी ई-वाहन बनाने वाली कंपनी टेस्‍ला ने जुलाई महीने में भारत में कदम रखा था, लेकिन बिक्री के लिहाज से अभी तक का प्रदर्शन काफी सुस्‍त रहा है. टेस्‍ला की प्रतिद्वंदी चीन की ई-वाहन कंपनी बीवाईडी ने भारत में कदम रखने के बाद दमदार प्रदर्शन किया है. अब टेस्‍ला ने दावा किया है कि अगर भारतीय ग्राहक उनकी कार खरीदते हैं तो अगले 4-5 साल में 20 लाख रुपये तक की बचत कर सकते हैं.

टेस्‍ला के जनरल मैनेजर (इंडिया) शरद अग्रवाल ने कहा है कि भारत में कंपनी के एंट्री लेवल मॉडल वाई की कीमत करीब 60 लाख रुपये है. लेकिन, इसे खरीदने वाले भारतीय ग्राहक ईंधन और मेंटनेंस की बचत करके करीब 20 लाख रुपये सेव कर सकते हैं. साथ ही इसकी रीसेल वैल्‍यू भी काफी अच्‍छी है और घर पर चार्जिंग की लागत पेट्रोल के मुकाबले महज 10 फीसदी पड़ती है. टेस्‍ला ने जुलाई से अब तक भारतीय बाजार में करीब 140 यूनिट बेची है.

कार की कीमत इतनी ज्‍यादा क्‍यों
भारत में टेस्‍ला के एंट्री लेवल मॉडल की कीमत करीब 60 लाख रुपये से भी ऊपर जाती है, जो देश में बिकने वाली ज्‍यादातर ई-कार की औसत कीमत 22 लाख से करीब 3 गुना ज्‍यादा है. अमेरिका में भी इसकी कीमत भारत के मुकाबले करीब 70 फीसदी कम है. सरकार की ओर से ई-वाहनों को प्रोत्‍साहन दिए जाने के बावजूद देश में कुल कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक का हिस्‍सा 5 फीसदी तक ही है. इसकी वजह है देश में कारों के आयात पर लगने वाला 100 फीसदी टैरिफ, जिसे मस्‍क ने भी दुनिया में सबसे ज्‍यादा बताया है.

महंगी ई-कार की डिमांड कम
ब्‍लूमबर्ग ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि साल 2025 की पहली छमाही के आंकड़े देखने से पता चलता है कि 45 लाख से 70 लाख रुपये की कीमत वाली सिर्फ 2,800 ई कारें बिकी हैं. इससे पता चलता है कि टेस्‍ला जिस मार्केट में अपनी जगह तलाश रही है, वह अभी काफी सीमित है. दूसरी ओर, चीन की प्रतिद्वंदी कंपनी बीवाईडी ने इस साल के शुरुआती 6 महीने में ही Sealion 7 SUV की 1,200 से ज्यादा यूनिट्स बेचकर बेहतर प्रदर्शन किया है.

बढ़ती जा रही टेस्‍ला की चुनौती
अमेरिकी कंपनी टेस्‍ला की भारतीय बाजार में चुनौतियां सिर्फ कीमत तक ही समाप्‍त नहीं होंगी, बल्कि टेस्‍ला को व्‍यापार समझौते से जिस टैरिफ में राहत की उम्‍मीद थी, वह भी धूमिल होती जा रही है. फिलहाल भारतीय बाजार में कुछ मॉडल की कारों पर 110 फीसदी टैरिफ पहुंच गया है और अमेरिका के साथ व्‍यापार समझौते की राह भी आसान नहीं दिख रही है. टेस्‍ला को अपनी जर्मन फैक्‍ट्री से कारों के भारत में निर्यात की उम्‍मीद थी, लेकिन ईयू के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत अभी अधूरी है. अगर कंपनी अपनी कीमतें कम चाहे तो ग्‍लोबल मार्केट में जारी उठापटक की वजह से यह भी मुमकिन नहीं है. कंपनी ने अपनी रणनीति को और मजबूत बनाने के लिए लैंबॉर्गिनी इंडिया के पूर्व प्रमुख शरद अग्रवाल को गुरुग्राम ऑपरेशंस का नेतृत्व भी सौंपा है.