Bharat Series Number Plate को लेकर लोगों के मन में तमाम सवाल रहते हैं. ये किसे मिल सकती है? कितने दिनों तक वैलिड रहती है? क्या इसे खरीदने से पैसों की बचत होगी? BH Number वाली गाड़ी बेच सकते हैं या नहीं? ऐसे तमाम सवाल लोगों के मन में कौंधते रहते हैं.
अगर आप भी ऐसा कुछ सोच रहे हैं, तो सही पते पर आ पहुंचे हैं. अपने इस लेख में हम BH Series नंबर प्लेट के बारे में एक-एक चीज जानने वाले हैं. इसको बनने में आने वाले खर्च से लेकर इलिजिबिलिटी और वैलेडिटी डिटेल पर भी नजर डालते हैं. साथ ही BH Number Plate के नफा-नुकसान भी जानेंगे.
भारत सीरीज (BH) नंबर प्लेट क्या है?
भारत सीरीज या BH नंबर प्लेट भारत सरकार द्वारा अगस्त 2021 में शुरू की गई एक राष्ट्रीय स्तर की वाहन पंजीकरण प्रणाली है. इसमें BH शब्द भारत के पहले दो अक्षरों से लिया गया है. ये सामान्य राज्य-आधारित नंबर प्लेटों से अलग है, क्योंकि ये पूरे देश में वैध होती है. सामान्य नंबर प्लेटें जैसे UP, DL या MH राज्य-विशेष होती हैं और राज्य बदलने पर वाहन को दोबारा रजिस्टर कराना पड़ता है, लेकिन BH प्लेट के साथ ऐसा नहीं है.
BH Series Number Plate
ये उन लोगों के लिए डिजाइन की गई है जो अक्सर राज्य बदलते हैं, जैसे सरकारी कर्मचारी या निजी क्षेत्र के लोग. BH प्लेट का फॉर्मेट कुछ इस प्रकार होता है: YY BH 0000 AA, जहां YY रजिस्ट्रेशन के साल के आखिरी दो अंक (जैसे 2025 के लिए 25), BH भारत के लिए, 0000 एक रैंडम चार-अंक की संख्या और AA रैंडम दो अक्षर हैं. इसमें होलोग्राम, लेजर नंबर और बारकोड जैसे सेफ्टी फीचर्स भी शामिल होते हैं.
BH नंबर प्लेट किसे मिल सकती है? (Eligibility)
BH सीरीज नंबर प्लेट केवल प्राइवेट कार या बाइक के लिए उपलब्ध है. ये सभी के लिए नहीं है. इसमें सख्त पात्रता मानदंड हैं. अगर आप इनमें से कोई एक पात्रता रखते हैं, तो BH Number के साथ कार खरीद सकेंगे-
- राज्य या केंद्रीय सरकार के कर्मचारी, जिनके ट्रांसफर अक्सर होते हैं.
- रक्षा मंत्रालय के कर्मी या सेना के सदस्य.
- सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) के कर्मचारी.
- निजी क्षेत्र के कर्मचारी, जिनकी कंपनी कम से कम चार राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में पंजीकृत है और कार्यरत है.
- बैंक कर्मचारी भी योग्य हो सकते हैं, लेकिन यह कंपनी की बहु-राज्य उपस्थिति पर निर्भर करता है.
अप्लिकेशन के लिए आपको अपनी पात्रता साबित करने वाले डॉक्यूमेंट जैसे आईडी प्रूफ, एड्रेस प्रूफ, कंपनी का प्रमाण पत्र और फॉर्म 60 जमा करना पड़ता है. ये ऑनलाइन Vahan Portal के माध्यम से किया जाता है. अगर आप योग्य नहीं हैं, तो आवेदन अस्वीकार हो सकता है.
BH नंबर प्लेट कितने दिनों तक वैलिड रहती है?
BH नंबर प्लेट की वैधता सामान्यतः 14 से 15 वर्ष तक होती है, जो वाहन की लाइफ पर निर्भर करता है. उसके बाद, इसे हर 5 साल में रिन्यू कराना पड़ता है, जिसमें लगभग 500 रुपये का शुल्क लगता है. हालांकि, एक महत्वपूर्ण बात ये है कि रोड टैक्स का भुगतान 2 साल के ब्लॉक में किया जाता है.
उदाहरण के लिए, पहले 2 साल का टैक्स एडवांस में, फिर अगले 2 साल का और इसी तरह आगे. अगर वाहन 14 साल से पहले बेच दिया जाता है, तो शेष टैक्स रिफंड मिल सकता है. ये प्रणाली लंबे समय तक वैध रहती है, लेकिन नियमित टैक्स भुगतान जरूरी है. वैधता पूरे भारत में है, इसलिए राज्य बदलने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ेगा.
BH नंबर प्लेट कितने में बनेगी?
BH नंबर प्लेट बनवाने का खर्च सामान्य राज्य पंजीकरण से अलग है, क्योंकि रोड टैक्स इंजन क्षमता पर आधारित है, न कि राज्य-विशेष दरों पर. टैक्स स्ट्रक्चर कुछ इस प्रकार है-
- 10 लाख रुपये से कम कीमत वाले वाहन: 8% रोड टैक्स.
- 10-20 लाख रुपये वाले: 10% रोड टैक्स.
- 20 लाख से अधिक: 12% रोड टैक्स
- डीजल वाहनों पर 2% अतिरिक्त, इलेक्ट्रिक पर 2% कम.
ये टैक्स 2 साल के लिए एडवांस में लिया जाता है. इसके अलावा, रजिस्ट्रेशन फीस, HSRP (हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट) का खर्च (लगभग 400-500 रुपये) और अन्य फीस जैसे हाइपोथेकेशन चार्ज शामिल होते हैं. कुल मिलाकर, प्रारंभिक लागत सामान्य से थोड़ी अधिक हो सकती है, लेकिन लंबे समय में बचत होती है.
क्या BH नंबर प्लेट खरीदने से पैसों की बचत होगी?
BH प्लेट से पैसे की बचत हो सकती है, खासकर यदि आप अक्सर राज्य बदलते हैं. सामान्य प्लेट में राज्य बदलने पर NOC लेना, नए राज्य में रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स का पुनर्भुगतान (जो 15 साल का होता है) जरूरी होता है, जो हजारों रुपये और समय खर्च करता है.
BH प्लेट के साथ ये सब बच जाता है. टैक्स 2 साल के ब्लॉक में होने से कैश फ्लो बेहतर रहता है. हालांकि, अगर आप एक ही राज्य में रहते हैं, तो सामान्य प्लेट सस्ती पड़ सकती है, क्योंकि BH में प्रारंभिक टैक्स ज्यादा होता है. कुल मिलाकर, ट्रांसफरेबल जॉब वाले लोगों के लिए ये बचत का अच्छा विकल्प है.
BH नंबर प्लेट के नफा-नुकसान
- राष्ट्रीय वैधता: पूरे भारत में कहीं भी ड्राइव करें बिना रजिस्ट्रेशन की चिंता.
- समय और पैसे की बचत: राज्य बदलने पर NOC या री-रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं, जो महीनों का प्रोसेस बचाता है.
- टैक्स मैनेजमेंट: 2 साल के ब्लॉक में टैक्स, जो बजट फ्रेंडली है.
- सीमित पात्रता: हर कोई नहीं ले सकता, केवल विशिष्ट कैटेगरी के लोग ही खरीद सकेंगे।
- रीसेल मुश्किल: BH प्लेट वाली कार बेचने में समस्या होती है, क्योंकि खरीदार यदि योग्य नहीं तो प्लेट बदलनी पड़ सकती है और इसमें ज्यादा खर्च होगा.
- राज्य-विशेष सुविधाएं नहीं: कुछ राज्य BH प्लेट पर HSRP या अन्य लोकल रूल्स लागू नहीं करते, जिससे समस्या हो सकती है.