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Electric Car की मेंटेनेंस पेट्रोल-डीजल कारों से अलग होती है. इसमें इंजन ऑयल और स्पार्क प्लग जैसे कई पार्ट्स नहीं होते, लेकिन बैटरी, टायर, ब्रेक, कूलिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर की देखभाल बेहद जरूरी है. छोटी-छोटी लापरवाही आपकी EV की रेंज और बैटरी लाइफ पर असर डाल सकती है. जानिए महीने में कौन से चेकअप करने चाहिए और किन गलतियों से इलेक्ट्रिक कार को नुकसान हो सकता है.
Electric Car चलाने वालों को ध्यान रखनी चाहिए ये 5 बातें.
Electric Car पारंपरिक वाहनों से काफी अलग होती है क्योंकि इसमें इंजन ऑयल, स्पार्क प्लग या गियर बॉक्स जैसी चीजें नहीं होती हैं. फिर भी रेगुलर मेंटेनेंस जरूरी है ताकि बैटरी लंबी चले, रेंज बनी रहे और सेफ्टी बनी रहे. सही देखभाल से बैटरी की लाइफ 12 से 15 साल तक पहुंच सकती है. सबसे ज्यादा ध्यान बैटरी हेल्थ, टायर प्रेशर, ब्रेक सिस्टम, सॉफ्टवेयर और कूलिंग सिस्टम पर देना चाहिए.
हर महीने कुछ बेसिक चेकअप करने से महंगी मरम्मत से बचा जा सकता है. OEMs की गाइडलाइन फॉलो करें और सर्विस सेंटर पर समय-समय पर जांच करवाएं. इससे न सिर्फ कार की परफॉर्मेंस बेहतर रहती है बल्कि बिजली की खपत भी नियंत्रित रहती है. नियमित मेंटेनेंस इलेक्ट्रिक कार को लंबे समय तक किफायती और इको-फ्रेंडली बनाता है. आइए जानते हैं कि EV को कैसे बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है?
1. बैटरी की सही देखभाल कैसे करें
बैटरी इलेक्ट्रिक कार का सबसे महंगा हिस्सा है. रोजाना इस्तेमाल के लिए चार्ज लेवल 20 से 80 प्रतिशत के बीच रखें. पूरा 100 प्रतिशत या 0% तक डिस्चार्ज करने से बैटरी पर स्ट्रेस बढ़ता है. फास्ट चार्जिंग को सीमित रखें क्योंकि इससे गर्मी पैदा होती है. छायादार जगह पर पार्क करें और सॉफ्टवेयर अपडेट जरूर करवाएं. इससे बैटरी की उम्र बढ़ती है और रेंज स्टेबल रहती है.
2. टायरों का रेगुलर मेंटेनेंस
इलेक्ट्रिक कारें भारी होती हैं और इंस्टेंट टॉर्क देती हैं इसलिए टायर जल्दी घिसते हैं. हर महीने टायर प्रेशर चेक करें. सही प्रेशर से रेंज बढ़ती है और घिसावट कम होती है. हर 8,000 से 10,000 किलोमीटर पर टायर रोटेशन करवाएं. असमान घिसावट दिखे तो अलाइनमेंट चेक करवाएं. ईवी स्पेशल टायर इस्तेमाल करें जो लो रोलिंग रेजिस्टेंस वाले हों.
3. ब्रेक सिस्टम की समय-समय पर जांच
रीजनरेटिव ब्रेकिंग की वजह से पैड कम घिसते हैं, लेकिन जंग लगने का खतरा रहता है. साल में एक बार ब्रेक पैड, डिस्क और कैलिपर की जांच करवाएं. ब्रेक फ्लूइड हर दो से तीन साल में बदलवाएं, क्योंकि ये नमी सोख लेता है. कभी-कभी मैकेनिकल ब्रेक का इस्तेमाल करें ताकि सिस्टम एक्टिव रहे. इससे आपातकाल में ब्रेक सही काम करते हैं.
4. सॉफ्टवेयर अपडेट और कूलेंट चेक
ओवर-द-एयर सॉफ्टवेयर अपडेट बैटरी मैनेजमेंट और रेंज में सुधार करते हैं. नियमित रूप से अपडेट करें. बैटरी कूलिंग सिस्टम का कूलेंट लेवल समय-समय पर चेक करवाएं. कुछ मॉडलों में ये लंबे अंतराल पर बदलना पड़ता है. केबिन एयर फिल्टर हर साल या 15,000 किलोमीटर पर बदलें. इससे एसी की परफॉर्मेंस अच्छी रहती है.
5. चार्जिंग सिस्टम और अन्य जरूरी चेक
चार्जिंग केबल और पोर्ट को साफ रखें. गंदगी या नुकसान होने पर चार्जिंग स्लो हो सकती है. 12 वोल्ट बैटरी की भी जांच करवाएं. वाइपर ब्लेड और वॉशर फ्लूइड नियमित रूप से बदलें. हर साल पूरी सर्विस करवाएं, जिसमें सस्पेंशन और लाइट्स भी शामिल हों. इन छोटी बातों से कार सुरक्षित और कुशल बनी रहती है.
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राम मोहन मिश्र डिजिटल मीडिया के ऑटोमोटिव जगत में सक्रिय पत्रकार हैं और 2021 से लगातार ऑटो जर्नलिज्म के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. वर्तमान में वे न्यूज़18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर ऑटो डेस्क संभाल रहे…
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