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वैज्ञानिकों ने तैयार की बाल से भी पतली सोलर सेल, दिखेगी नहीं, लेकिन बिजली बनाएगी खूब

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On May 18, 2026
2 min read 1.2k views
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  • वैज्ञानिकों ने पतली, पारदर्शी सोलर सेल बनाई है।
  • यह खिड़कियों, कार विंडशील्ड पर लग सकती है।
  • थर्मल इवेपोरेशन प्रक्रिया से बड़ी मात्रा में बनती है।
  • सोलर पैनल से आधी क्षमता, पर भविष्य की आशा।

Ultra-thin Transparent Solar Cells: सोलर एनर्जी के लिए बड़े-बड़े पैनल की जरूरत खत्म हो सकती है. वैज्ञानिकों ने नई कमाल की सोलर सेल्स तैयार की हैं, जो कांच के किसी भी सरफेस पर लगकर सोलर पावर जनरेट कर सकती हैं. यानी इन सोलर सेल्स को घर की खिड़की से लेकर कार की विंडशील्ड और स्मार्टग्लासेस आदि पर यूज किया जा सकता है. इंसान के बाल के 10,000वें हिस्से भी पतली इन सेल्स को सिंगापुर की Nanyang Technological University के वैज्ञानिकों ने डेवलप किया है. आइए इन सेल्स की खास बातें जानते हैं

सोलर एनर्जी एडोप्शन को आसान बनाने की कोशिश

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई सेल्स कन्वेंशनल perovskite सोलर सेल्स से 50 गुना पतली है. दिखने में ये सेमी-ट्रांसपेरेंट और कलर न्यूट्रल है. इसका फायदा यह है कि इसे किसी भी ग्लास सरफेस पर यूज किया जा सकता है. यह खासकर उन शहरों में बहुत काम आ सकती है, जहां छतों पर पहले से सोलर पैनल लगे हैं, लेकिन खिड़कियों और वर्टिकल ग्लास फसाड का सोलर पावर जनरेशन के लिए यूज नहीं किया गया है. कांच वाली ऊंची-ऊंची बिल्डिंग्स के लिए भी ये सेल्स एकदम मुफीद हैं. अगर ये सेल्स बड़े स्तर पर कामयाब होती है तो क्लीन एनर्जी जनरेशन का पूरा गेम ही बदल जाएगा और लोग अपने घरों, गाड़ियों और डिवाइसेस का लुक बदले बिना भी उन्हें एनर्जी जनरेशन में यूज कर पाएंगे.

कैसे काम करेंगी ये सेल्स?

इन सेल्स को थर्मल इवेपोरेशन प्रोसेस यूज कर बनाया गया है. इस प्रोसेस में किसी मैटेरियल को तब तक वैक्यूम चैंबर में हीट किया जाता है, जब तक वह वेपर में बदलकर एक बहुत पतली लेयर में सेटल न हो जाए. इसे बनाने वाली यूनिवर्सिटी का कहना है कि इस तरीके से बड़े एरिया पर भी लेयर्स क्रिएट की जा सकती हैं. ये सेल्स डायरेक्ट सनलाइट के साथ-साथ डिफ्यूज लाइट में भी काम कर सकती हैं. यानी शहरों में कम धूप लगने वाली जगहों के लिए भी ये फायदेमंंद हैं.

एफिशिएंसी के मामले में हैं सोलर पैनल से पीछे

अभी इन सेल्स पर लैब में रिसर्च चल रही है और इन्हें प्रोडक्ट के तौर पर तैयार नहीं किया गया है. यूनिवर्सिटी ने इसके लिए पेटेंट दायर कर दिया है और मैन्युफैक्चरिंग के लिए कंपनियों से भी बातचीत शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक इन सेल्स की स्टेबिलिटी, लंबे समय तक यूज के लिए फिटनेस और बड़े इलाकों में यूज को टेस्ट नहीं किया गया है. साथ ही इनकी एफिशिएंसी भी सोलर पैनल के मुकाबले लगभग आधी है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։