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GPS Spoofing का खेल अब खत्म? नया Portable Device रियल टाइम में पकड़ लेगा Fake Location, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On May 12, 2026
2 min read 1.2k views
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  • वैज्ञानिकों ने नकली GPS सिग्नल पकड़ने वाला पोर्टेबल डिवाइस बनाया।
  • यह डिवाइस रियल टाइम में GPS Spoofing का पता लगाता है।
  • तकनीक सिग्नल जाम होने पर ही नहीं, छेड़छाड़ पर भी पकड़ती है।
  • यह आम लोगों और सुरक्षा के लिए अत्यंत उपयोगी होगा।

Portable Device: आज की दुनिया में GPS हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा बन चुका है. चाहे रास्ता ढूंढना हो, ऑनलाइन डिलीवरी ट्रैक करनी हो या फोन में मैप इस्तेमाल करना हो, हर जगह लोग GPS पर भरोसा करते हैं. लेकिन अगर यही लोकेशन गलत दिखाई जाए तो क्या होगा? इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया पोर्टेबल डिवाइस तैयार किया है जो रियल टाइम में नकली GPS सिग्नल यानी GPS Spoofing को पकड़ सकता है.

क्या होता है GPS Spoofing?

GPS Spoofing एक ऐसी तकनीक है जिसमें नकली सिग्नल भेजकर GPS सिस्टम को भ्रमित किया जाता है. इससे डिवाइस को गलत लोकेशन दिखाई देने लगती है जबकि असल में वह कहीं और मौजूद होता है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई ट्रक कीमती सामान लेकर जा रहा हो तो ट्रैकिंग सिस्टम में वह सही रास्ते पर दिख सकता है लेकिन वास्तव में उसे किसी दूसरी जगह मोड़ा जा सकता है. यही वजह है कि Spoofing को सामान्य GPS Jammer से ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसमें सब कुछ सामान्य दिखाई देता है.

वैज्ञानिकों ने तैयार किया नया स्मार्ट डिटेक्टर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Oak Ridge National Laboratory के वैज्ञानिकों ने ऐसा पोर्टेबल डिवाइस विकसित किया है जो चलते वाहन या किसी भी स्थिति में नकली GPS सिग्नल की पहचान कर सकता है. दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया का पहला हाई-सेंसिटिव और रियल टाइम GPS Spoofing Detector है. इस तकनीक की खास बात यह है कि यह केवल सिग्नल ब्लॉक होने पर नहीं बल्कि तब भी Spoofing पकड़ सकता है जब नकली सिग्नल असली सैटेलाइट सिग्नल जितने मजबूत हों.

यह डिवाइस कैसे करता है काम?

आमतौर पर GPS सिस्टम सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल पर निर्भर करते हैं लेकिन नया डिटेक्टर अलग तरीके से काम करता है. यह Advanced Radio Technology और Powerful Computing की मदद से सिग्नल्स का सीधा विश्लेषण करता है. यानी यह बिना किसी पारंपरिक GPS रिसीवर के भी समझ सकता है कि सिग्नल असली हैं या उनमें छेड़छाड़ की गई है. इसी वजह से यह तकनीक मौजूदा सिस्टम की तुलना में ज्यादा तेज और भरोसेमंद मानी जा रही है.

क्यों बढ़ रहा है GPS Spoofing का खतरा?

हाल के वर्षों में GPS Spoofing और GPS Jamming के मामले तेजी से बढ़े हैं. हालांकि कई देशों में GPS Jammer इस्तेमाल करना गैरकानूनी है फिर भी इंटरनेट पर ऐसे उपकरण आसानी से मिल जाते हैं. कुछ मामलों में अपराधियों ने ट्रक और शिपमेंट हाईजैक करने के लिए नकली GPS लोकेशन का इस्तेमाल किया है. खासकर खतरनाक या संवेदनशील सामान ले जाने वाले वाहनों के लिए यह बड़ा सुरक्षा खतरा बन चुका है.

आम लोगों को कैसे होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई तकनीक केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है. अगर किसी ड्राइवर या कंपनी को तुरंत पता चल जाए कि उनका GPS सिस्टम गलत लोकेशन दिखा रहा है तो वे समय रहते कार्रवाई कर सकते हैं. वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना Carbon Monoxide Alarm से की है जो खतरा बढ़ने से पहले लोगों को चेतावनी देता है.

भविष्य में और सुरक्षित हो सकता है GPS

शोधकर्ताओं का लक्ष्य इस डिवाइस को सस्ता और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का है ताकि ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके. आज जब दुनिया तेजी से डिजिटल सिस्टम पर निर्भर हो रही है ऐसे में GPS जैसी तकनीकों को सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी हो गया है. यह नया डिटेक्टर उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։