Second Hand Car खरीदने से पहले जरूर करें ये 5 काम, नहीं तो बेकार चली जाएगी गाढ़ी कमाई

Used Car Buying Tips: कम बजट में अच्छी गाड़ी तलाशने वालों के लिए Second Hand Car काफी बेहतर ऑप्शन हैं. नई कारों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और महंगाई के दौर में बजट को संभालना जरूरी है. ऐसे में एक अच्छी सेकंड-हैंड कार न केवल पैसे बचाएगी, बल्कि अगर सही तरीके से चुनी जाए, तो कई सालों तक बिना ज्यादा परेशानी के चल सकती है.

हालांकि, इस प्रक्रिया में कई जोखिम भी छिपे होते हैं. इसमें छिपी हुई खराबी, फर्जी कागजात, ओडोमीटर टैम्परिंग या महंगी रिपेयर कॉस्ट शामिल है. भारत में हर साल लाखों सेकंड-हैंड कारें बिकती हैं, लेकिन ज्यादातर खरीदार बाद में पछताते हैं, क्योंकि वे जल्दबाजी में या भावनाओं में आकर फैसला ले लेते हैं. अच्छी डील पाने के लिए बढ़िया रिसर्च और सतर्कता सबसे महत्वपूर्ण हैं. आइए, जानते हैं कि पुरानी कार खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

1. बजट और जरूरत तय करें

सबसे पहले अपना बजट फिक्स करें और उसमें 10-15% एक्स्ट्रा रखें, क्योंकि इसमें रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और रिपेयर के लिए थोड़े पैसे बाद में जरूरत पड़ सकते हैं. फैमिली साइज, फ्यूल टाइप (पेट्रोल/डीजल/CNG), माइलेज और यूज (सिटी/हाईवे) के आधार पर कार चुनें.

2. मार्केट रिसर्च करें

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे CarDekho, OLX, Cars24, Spinny या OLX पर उसी मॉडल की कीमतें चेक करें. True Value या Maruti True Value जैसी सर्टिफाइड जगहों से भी गाड़ी की तुलना की जा सकती है. लोकल मार्केट में भी 4-5 डीलर से बात कर लें,जिससे सही कीमत पता चल सके.

3. कार की हिस्ट्री और डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन

RC, इंश्योरेंस, PUC, सर्विस हिस्ट्री, NOC (अगर फाइनेंस्ड थी) और बैंक NOC जरूर देखें. इसके लिए Parivahan.gov.in पर चेसिस/इंजन नंबर से डिटेल्स वेरिफाई करें. एक्सीडेंट हिस्ट्री, फ्लड डैमेज या मल्टीपल ओनर चेक करें.

4. फिजिकल और मैकेनिकल इंस्पेक्शन

दिन की रोशनी में कार देखें. बॉडी पेंट, रस्ट, एक्सीडेंट के निशान, टायर की कंडीशन (मैन्युफैक्चरिंग डेट), लाइट्स, AC, इंजन साउंड, ब्रेक, सस्पेंशन चेक करें. टेस्ट ड्राइव लंबी लें. जिसमें सिटी, हाईवे, स्पीड ब्रेकर सब शामिल होना चाहिए.

5. ट्रस्टेड मैकेनिक से जांच करवाएं

कभी भी डीलर के मैकेनिक पर भरोसा न करें. अपना जाना-पहचाना मैकेनिक या ऑटोमोबाइल इंजीनियर से प्री-पर्चेज इंस्पेक्शन करवाएं. इससे छिपी खराबी जैसे इंजन ओवरहॉल, क्लच/गियरबॉक्स इश्यू पकड़ी जा सकती है.

6. बार्गेनिंग स्मार्टली करें

मार्केट रेट से 10-15% कम ऑफर दें. छोटी-मोटी खराबी दिखाकर नेगोशिएट करें. सर्टिफाइड कारों पर भी डिस्काउंट मांगें. साथ में ये जरूर ध्यान रखें कि गाड़ी की कीमत पूरी तरह से ऑनलाइन पेमेंट या फिर चेक के माध्यम से चुकाएं. ऐसे में आपके पास पेमेंट का प्रूफ रहता है. बात पक्की होने के बाद गाड़ी का ट्रांसफर भी कराना जरूरी है.