ADAS: कितना जरूरी है ये फीचर, कैसे करता है काम और अलग-अलग लेवल का क्या मतलब?

सतीश कुमार
6 Min Read

ADAS यानी Advanced Driver Assistance Systems मौजूदा समय में कारों के लिए सबसे जरूरी सेफ्टी फीचर्स में से एक हो चुका है. ये सेंसर, कैमरा, रडार, LiDAR और AI का इस्तेमाल करके वाहन के आसपास के वातावरण को लगातार मॉनिटर करता है. ADAS का मुख्य उद्देश्य मानवीय गलतियों को कम करना, दुर्घटनाओं को रोकना और ड्राइविंग को आसान बनाना है.

ये ड्राइवर को अलर्ट देता है या ऑटोमैटिक रूप से ब्रेक, स्टीयरिंग जैसी कार्रवाई करता है. आजकल ज्यादातर नई कारों में Level 1 या Level 2 ADAS मिलता है, जो भविष्य में सेमी-ऑटोनॉमस और फुल ऑटोनॉमस ड्राइविंग की नींव रख रहा है. ये तकनीकि क्या है, कैसे काम करती है, इसके क्या फीचर्स हैं और ये आपके लिए कितना जरूरी है? आइए, सब जान लेते हैं.

ADAS क्या है और ये कैसे काम करता है?

ADAS एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है, जो ड्राइवर की मदद करता है. ये वाहन के चारों ओर के डेटा को इकट्ठा करता है, उसे प्रोसेस करता है और जरूरत पड़ने पर अलर्ट या इंटरवेंशन करता है. ये सिस्टम रियल-टाइम में काम करता है और दुर्घटना की संभावना को 30-50% तक कम कर सकता है. इसके मेन कंपोनेंट्स में नीचे दी गई चीजें शामिल हैं-

  • सेंसर और इनपुट डिवाइस- कैमरा (विजुअल डिटेक्शन के लिए), रडार (दूरी और स्पीड मापने के लिए, खासकर खराब मौसम में), LiDAR (3D मैपिंग) और अल्ट्रासोनिक सेंसर (पार्किंग के लिए).
  • प्रोसेसिंग यूनिट- ECU या SoC जो डेटा फ्यूजन करता है और AI/ML एल्गोरिदम से निर्णय लेता है.
  • आउटपुट- अलर्ट (बीप, वाइब्रेशन, डिस्प्ले) या एक्टिवेशन (ब्रेक, स्टीयरिंग).

ADAS के लेवल

SAE International ने ड्राइविंग ऑटोमेशन को 6 लेवल में बांटा है-

  • Level 0- कोई ऑटोमेशन नहीं, सिर्फ अलर्ट (जैसे फॉरवर्ड कोलिजन वॉर्निंग).
  • Level 1- एक फंक्शन पर कंट्रोल (जैसे Adaptive Cruise Control या Lane Keep Assist में से एक).
  • Level 2- दोनों स्टीयरिंग और एक्सेलरेशन/ब्रेकिंग पर कंट्रोल (ज्यादातर भारतीय और ग्लोबल कारों में यही मिलता है, जैसे Tesla Autopilot का बेसिक वर्जन). ड्राइवर को हमेशा तैयार रहना पड़ता है.
  • Level 3- कंडीशनल ऑटोमेशन, सिस्टम कुछ स्थितियों में पूरा कंट्रोल लेता है, लेकिन ड्राइवर को इंटरवीन करने के लिए तैयार रहना होता है.
  • Level 4 और 5- हाई/फुल ऑटोमेशन (ADAS से आगे, ऑटोनॉमस व्हीकल कैटेगरी).

ADAS के फीचर्स और उनके काम

1. Adaptive Cruise Control (ACC)- आगे वाली गाड़ी से सुरक्षित दूरी बनाए रखता है, स्पीड खुद एडजस्ट करता है.
2. Automatic Emergency Braking (AEB)- कोलिजन डिटेक्ट होने पर ऑटो ब्रेक लगाता है, पैदल यात्री/साइकिल डिटेक्शन के साथ.
3. Lane Departure Warning / Lane Keep Assist- लेन से बाहर जाने पर अलर्ट देता है और स्टीयरिंग सही करता है.
4. Blind Spot Monitoring- साइड मिरर में नहीं दिखने के बावजूद भी ब्लैक स्पॉट मॉनीटर करता है.
5. Forward Collision Warning- आगे खतरा होने पर चेतावनी देता है.
6. Pedestrian Detection- पैदल चलने वालों को पहचानकर ब्रेक लगाता है.
7. Traffic Sign Recognition- साइन बोर्ड पढ़कर डिस्प्ले पर दिखाता है.
8. Auto High Beam / Glare-Free Beam- आने वाली गाड़ियों को ब्लाइंड न करने के लिए हाई बीम एडजस्ट करता है.
9. Rear Cross Traffic Alert / Parking Assistance- रिवर्स में मदद, ऑटो पार्किंग भी करता है.
10. Driver Monitoring System- ड्राइवर की थकान/ध्यान भटकने पर अलर्ट भेजता है.

ADAS के फायदे

  • दुर्घटनाएं 40-60% तक कम हो सकती हैं (IIHS स्टडी).
  • लंबी ड्राइविंग में थकान कम होती है.
  • फ्यूल एफिशिएंसी बेहतर (ACC से) रहती है.
  • इंश्योरेंस में छूट मिल सकती है.

चुनौतियां और सीमाएं

  • खराब मौसम, गंदगी से सेंसर ढंग से काम नहीं करते.
  • बहुत ज्यादा निर्भरता से ड्राइवर कम सतर्क हो सकता है.
  • महंगा मेंटेनेंस और रिपेयर.
  • भारत में रोड कंडीशन, मार्किंग की कमी से कुछ फीचर्स कम प्रभावी.

उम्मीद है कि आप ADAS के बारे में लगभग सारी चीजें जान गए होंगें. अगर आप भविष्य में एक एडास वाली कार खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो हमारा ये आर्टिकल आपकी मदद करेगा. मौजूदा समय में कम कीमत पर भी ADAS वाली गाड़ियां मिल जाती हैं.

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Satish Kumar Is A Journalist With Over 10 Years Of Experience In Digital Media. He Is Currently Working As Editor At Aman Shanti, Where He Covers A Wide Variety Of Technology News From Smartphone Launches To Telecom Updates. His Expertise Also Includes In-depth Gadget Reviews, Where He Blends Analysis With Hands-on Insights.