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AC-Fridge खरीदने वालों के लिए खतरे की घंटी! सरकारी रोक के बाद आ सकता है बड़ा संकट

Aman Shanti .In
By Aman Shanti .In On May 19, 2026
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  • सरकार का लक्ष्य स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देना है।

AC And Refrigerators Compressor Import Restricted: अगर आप झुलसा देने वाली गर्मी से बचने के लिए एसी और फ्रिज खरीदना चाहते हैं तो जल्दी करें. अगर आप इंतजार के मूड में हैं तो आपको इन अप्लायंसेस की किल्लत झेलनी पड़ सकती है. इसका असर यह होगा कि आपको स्टोर पर एसी और फ्रिज के कम मॉडल नजर आएंगे और जो मिलेंगे, उनके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. दरअसल, सरकार ने कंप्रेसर के आयात पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. इस कारण एसी और फ्रिज में यूज होने वाले इस सबसे जरूरी पार्ट की कमी होने के चांस बढ़ गए हैं. इसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है.

कंपनियों ने दी चेतावनी

सरकार के इस फैसले के बाद एसी और फ्रिज बनाने वाली कंपनियों जैसे एलजी, सैमसंग और ब्लूस्टार आदि ने चेतावनी दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कंपनियों का कहना है कि सरकार ने विदेशों से कंप्रेसर मंगवाने पर रोक लगा दी है, लेकिन देश में इतने कंप्रेसर नहीं बन रहे हैं, जिससे डिमांड पूरी हो सके. बताया जा रहा है कि सरकार ने लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला लिया है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी से मार्केट की डिमांड पूरी नहीं हो सकती. इस कारण अगर इंपोर्ट रुकता है तो कंपोनेंट की कमी हो जाएगी, जिसका असर एसी और फ्रिज जैसे अप्लायेंस की अवैलेबिलिटी पर पड़ेगा.

क्या कहता है सरकारी आदेश?

सरकारी आदेश के अनुसार, कंपनियां रेफ्रिजरेटर के कंप्रेसर का आयात वित्त वर्ष 2025 में किए गए आयात का अधिकतम 40 प्रतिशत और और एयर-कंडीशनर के कंप्रेसर का अधिकतम 30 प्रतिशत तक कर सकेंगी. यह नियम दो टन तक की क्षमता वाले एसी और फ्रिज पर लागू होगा. कुल बिक्री में इनका करीब 85 प्रतिशत हिस्सा है. बता दें कि भारत में एसी कंप्रेसर की डिमांड का लगभग 50 प्रतिशत और फ्रिज कंप्रेसर की डिमांड का लगभग 60 प्रतिशत प्रोडक्शन होता है. इसके चलते कंपनियों को बाहर से कंप्रेसर मंगवाने पड़ते हैं.

ग्राहकों पर पड़ेगा सीधा असर

सरकारी आदेश के बाद अब इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा. अगर कंपनियों को पर्याप्त कंपोनेंट्स नहीं मिलेंगे तो प्रोडक्शन कम होगा. इससे बाजार में ग्राहकों के लिए ऑप्शन कम होंगे और उन्हें प्रोडक्ट्स के लिए ज्यादा कीमत भी चुकानी पड़ेगी. दूसरी तरफ कंपनियों को इंपोर्ट बंद होने के बाद नए वेंडर ढूंढने पड़ेंगे. इसमें समय भी लगता है और लॉजिस्टिक समेत कई चुनौतियों के कारण कंपनियों की लागत बढ़ेगी. इसका भी असर ग्राहकों की जेब पर पड़ना तय है.

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Սաթիշ Կումարը թվային բովանդակության ստեղծող և նորությունների հրատարակիչ է։ Նա գրում է հոդվածներ պետական ​​ծրագրերի, տեխնոլոգիական նորությունների և ավտոմոբիլային թարմացումների վերաբերյալ։ Նրա հոդվածների նպատակն է մարդկանց ճիշտ և արագ տեղեկատվություն տրամադրելը։