Mercedes Benz Manufacturing Defect| Mercedes Benz Consumer Court compensation| मर्सिडीज कार ने दे दिया धोखा! 6 महीने में ही हुई खराब, कंज्यूमर कोर्ट ने ठोका 1.78 करोड़ का जुर्माना


दिल्ली के एक शख्स गुरविंदर खुराना को मर्सिडीज-बेंज इंडिया को 1.78 करोड़ रुपये देने का आदेश मिला है, क्योंकि उनकी कार में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट पाया गया. समरन मीडिया कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर गुरविंदर खुराना ने नवंबर 2022 में मर्सिडीज-बेंज EQS580 कार 1.55 करोड़ रुपये में खरीदी थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ये लग्जरी कार थी, लेकिन सिर्फ छह महीने बाद ही इसमें कई दिक्कतें शुरू हो गईं. दिल्ली स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने इस मामले में फैसला सुनाया और कंपनी को भारी भरकम मुआवजा देने को कहा.

कार में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट

कमीशन ने अपने 12 सितंबर के आदेश में कहा कि कार बिल्कुल नई थी, फिर भी छह महीने में इसकी बैटरी पैक बदलनी पड़ी. ये साफ दिखाता है कि कार में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट था. कमीशन ने ये भी कहा कि इतनी जल्दी इतनी बड़ी खराबी का आना मतलब कार में पहले से ही कुछ गड़बड़ थी. छोटी-मोटी खराबी तो आसानी से ठीक हो जाती, लेकिन इसके लिए बार-बार वर्कशॉप जाना पड़ा, जो गलत है.

गुरविंदर ने बताया कि कार ने सिर्फ 9,000 किलोमीटर चलने के बाद ही दिक्कतें शुरू कर दीं. रियर टायर में उभार, कार का अचानक रुक जाना, रडार सेंसर फेल होना, सेंसर में खराबी और एसी ब्लोअर से अजीब सी आवाज जैसी कई समस्याएं आईं. कई बार वर्कशॉप ले जाने के बाद भी ये दिक्कतें ठीक नहीं हुईं. कमीशन ने देखा कि ये समस्याएं खरीद के छह महीने के अंदर शुरू हुईं और आज तक बनी हुई हैं, भले ही कंपनी ने कई बार ठीक करने की कोशिश की.

कमीशन ने दलीलों को किया खारिज

मर्सिडीज-बेंज ने अपनी सफाई में कहा कि गुरविंदर कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत ‘कंज्यूमर’ नहीं हैं, क्योंकि कार कमर्शियल काम के लिए खरीदी गई थी. कंपनी ने ये भी कहा कि कमीशन को इस मामले को सुनने का अधिकार नहीं है और गुरविंदर ने मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित करने के लिए कोई एक्सपर्ट सबूत नहीं दिया. लेकिन कमीशन ने इन दलीलों को खारिज कर दिया. कमीशन की अध्यक्ष जस्टिस संगीता धींगरा सहगल और मेंबर पिंकी ने कहा कि चूंकि मर्सिडीज ने EQS580 मॉडल को भारत में बंद कर दिया है, इसलिए कार बदलना मुमकिन नहीं. ऐसे में कंपनी को कार की पूरी कीमत वापस करनी होगी.

इतने करोड़ रुपये का लगा जुर्माना

मुआवजे में कार की कीमत 1.55 करोड़, इंश्योरेंस और रोड टैक्स के 3.1 लाख, टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स के 1.55 लाख और 1 करोड़ के लोन पर 60 महीने का ब्याज 16 लाख शामिल किया गया. इसके अलावा, कंपनी को मानसिक परेशानी के लिए 5 लाख और मुकदमे के खर्च के लिए 50,000 रुपये देने को कहा गया. कुल मिलाकर 1.78 करोड़ रुपये का मुआवजा बनता है.

महंगी गाड़ी खराब होने पर आप क्या कर सकते हैं?

ये मामला उन लोगों के लिए सबक है जो महंगी गाड़ियां खरीदते हैं. इतनी कीमत देने के बाद भी अगर कार में दिक्कत आए तो कंज्यूमर कोर्ट आपकी मदद कर सकता है. मर्सिडीज जैसी बड़ी कंपनी को भी नियम मानने पड़ते हैं. अगर आप भी लग्जरी कार खरीदने की सोच रहे हैं, या आपके पास लग्जरी गाड़ी है और वह कुछ ही महीनों में खराब हो जाए तो सबसे पहले गाड़ी की दिक्कत को अच्छे से डॉक्यूमेंट करें. हर बार जब आप सर्विस सेंटर जाएं, तो रिपेयर की डिटेल्स, डेट, और क्या ठीक किया गया, इसका रिकॉर्ड रखें.

अगर दिक्कत बार-बार आ रही है, तो ये लिखित में नोट करें. फिर, कंपनी को लिखित में शिकायत करें. डीलर और मैन्युफैक्चरर को ईमेल या रजिस्टर्ड पत्र भेजें, जिसमें सारी समस्याएं और सर्विस हिस्ट्री बताएं. साफ पूछें कि क्या वो कार ठीक करेंगे, रिप्लेस करेंगे या रिफंड देंगे. जवाब का इंतजार करें और उसे भी रिकॉर्ड में रखें.

अगर कंपनी संतोषजनक जवाब न दे, तो कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत करें. दिल्ली, जिला या स्टेट कंज्यूमर फोरम में केस फाइल कर सकते हैं. शिकायत में गाड़ी की कीमत, इंश्योरेंस, टैक्स, लोन का ब्याज, और मानसिक परेशानी का मुआवजा मांग सकते हैं.



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