UP Electricity: बिजली का बिल ज्यादा आ गया हो, मीटर में खराबी हो या अचानक बिजली गुल हो जाए, तो शिकायत लेकर किस अधिकारी के पास जाएं? उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में बिजली उपभोक्ताओं के सामने यह सवाल अक्सर खड़ा होता है. अब इस परेशानी को दूर करने के लिए बिजली वितरण की पुरानी व्यवस्था फिर से लागू करने पर विचार हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, वर्टिकल व्यवस्था की खामियों को देखते हुए नवंबर से इस पर नए सिरे से मंथन शुरू होने की संभावना है. हालांकि, व्यवस्था को वापस लेने पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
अलग-अलग शिकायतों के लिए अलग अधिकारी, उपभोक्ता परेशान
लखनऊ, मेरठ, कानपुर, वाराणसी, अलीगढ़ और नोएडा जैसे शहरों में बिजली वितरण की वर्टिकल व्यवस्था लागू है. इसमें मीटर, बिजली वितरण और दूसरी सेवाओं के लिए अलग-अलग अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है. परेशानी तब होती है, जब उपभोक्ता को यह पता ही नहीं होता कि उसकी शिकायत किस अधिकारी के दायरे में आती है. मीटर में खराबी होने पर संबंधित अभियंता और दूसरी समस्या होने पर दूसरे जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क करना पड़ सकता है. ऐसे में शिकायत का समाधान कराने के लिए उपभोक्ताओं को भटकना पड़ सकता है.
पुरानी व्यवस्था में उपकेंद्र से मिलती थी मदद
वर्टिकल व्यवस्था लागू होने से पहले उपभोक्ता बिजली से जुड़ी समस्या लेकर अपने क्षेत्र के बिजली उपकेंद्र पहुंच सकते थे. मीटर की शिकायत हो या बिजली का फॉल्ट, उपकेंद्र से शिकायत के समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी. इसी व्यवस्था को फिर से लागू करने की मांग उठ रही है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई जनप्रतिनिधि भी वर्टिकल व्यवस्था की खामियों को लेकर पावर कॉरपोरेशन और वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को पत्र लिख चुके हैं.
नियामक आयोग में भी उठा व्यवस्था का मुद्दा
बिजली वितरण की वर्टिकल व्यवस्था को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में याचिका दायर की है. परिषद का तर्क है कि आयोग की सहमति के बिना वितरण व्यवस्था के ढांचे में बदलाव नहीं किया जा सकता. मामला फिलहाल विचाराधीन है. वहीं, आयोग ने इस साल के टैरिफ आदेश में पावर कॉरपोरेशन को वर्टिकल व्यवस्था का थर्ड पार्टी मूल्यांकन कराने का निर्देश दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर तक यह मूल्यांकन नहीं हो सका. परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा है कि मूल्यांकन नहीं होने पर वह दोबारा आयोग का रुख करेंगे.
त्योहारों पर गांवों में भी 24 घंटे बिजली देने की तैयारी
बिजली वितरण व्यवस्था में बदलाव की चर्चा के बीच प्रदेश में त्योहारों के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति की तैयारी भी चल रही है. सामान्य रोस्टर के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे बिजली मिलती है, लेकिन दशहरा, दीपावली और छठ जैसे त्योहारों पर 24 घंटे बिजली देने के निर्देश दिए गए हैं. पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार के मुताबिक, त्योहारों के दौरान रोस्टर व्यवस्था खत्म कर निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की तैयारी है. इसके लिए पांचों डिस्कॉम बिजली लाइनों और बुनियादी ढांचे का रखरखाव करने के साथ ट्रिपिंग रोकने पर भी काम कर रहे हैं.
ध्यान दें: यूपी में बिजली वितरण की पुरानी व्यवस्था बहाल करने पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. फिलहाल इस प्रस्ताव पर नए सिरे से मंथन किए जाने की संभावना है.