- भविष्य में यह तकनीक स्वास्थ्य निगरानी को पूरी तरह बदल देगी।
Wearable Sensor: कई सालों से डॉक्टर शरीर की स्थिति समझने के लिए ब्लड टेस्ट पर निर्भर रहे हैं. इन टेस्ट्स से यह पता चलता है कि लिवर और किडनी जैसे अंग ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं, और दवाइयों का असर कैसा है. लेकिन इनकी सबसे बड़ी कमी यह है कि ये सिर्फ एक समय की जानकारी देते हैं जिससे कई अहम बदलाव नजरअंदाज हो सकते हैं.
नई तकनीक से हेल्थ मॉनिटरिंग का बदला तरीका
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, लॉस एंजेलिस के वैज्ञानिकों ने एक नई दिशा दिखाई है. उन्होंने एक छोटा wearable डिवाइस तैयार किया है जो त्वचा के जरिए शरीर के जरूरी तत्वों को लगातार ट्रैक कर सकता है. यह डिवाइस पुराने टेस्ट्स की तरह एक बार की जानकारी देने के बजाय लगातार निगरानी करता है जिससे शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव भी समय रहते पकड़ में आ सकते हैं.
माइक्रोनीडल तकनीक कैसे करती है काम?
इस सेंसर में बेहद छोटे-छोटे माइक्रोनीडल्स का इस्तेमाल किया गया है जो त्वचा के नीचे हल्के से फिट हो जाते हैं और किसी तरह की तकलीफ भी नहीं देते. ये माइक्रोनीडल्स खास तरह के अणुओं को पहचानते हैं और उनके संपर्क में आने पर इलेक्ट्रिकल सिग्नल बनाते हैं जिससे शरीर के अंदर चल रही प्रक्रियाओं की जानकारी मिलती रहती है.
ज्यादा संवेदनशील और लंबे समय तक सटीक
इस डिवाइस की खासियत इसका नया डिजाइन है जिसमें बहुत छोटे-छोटे छिद्र बनाए गए हैं. इससे यह सेंसर पहले के मुकाबले ज्यादा संवेदनशील हो गया है और कई दिनों तक बिना सटीकता खोए काम कर सकता है. यानी एक बार लगाने के बाद यह लगातार भरोसेमंद डेटा देता रहता है.
ऑर्गन की हालत का पहले ही पता
वैज्ञानिकों ने इस डिवाइस को जानवरों पर टेस्ट किया जहां उन्होंने अलग-अलग दवाओं के शरीर में व्यवहार को ट्रैक किया. जब दवाएं शरीर में ज्यादा समय तक रहीं, तो यह संकेत मिला कि संबंधित अंग जैसे लिवर या किडनी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. सबसे खास बात यह रही कि यह सेंसर उन समस्याओं को भी पहले पहचान सका जिन्हें सामान्य ब्लड टेस्ट नहीं पकड़ पाए थे.
इलाज में होगा बड़ा फायदा
अगर बीमारी या अंगों की खराबी का पता पहले ही चल जाए तो डॉक्टर समय रहते इलाज में बदलाव कर सकते हैं. इससे गंभीर साइड इफेक्ट्स से बचा जा सकता है. यह खासकर उन मरीजों के लिए फायदेमंद होगा जो भारी दवाइयां जैसे कीमोथेरेपी या एंटीबायोटिक्स लेते हैं क्योंकि ये दवाएं अंगों पर असर डाल सकती हैं.
भविष्य में और भी स्मार्ट बन सकता है यह डिवाइस
आने वाले समय में इस तकनीक को और विकसित किया जा सकता है. एक ही पैच में कई सेंसर जोड़े जा सकते हैं जो अलग-अलग तत्वों को ट्रैक करेंगे. इससे डॉक्टर को मरीज की हेल्थ की पूरी और रियल-टाइम तस्वीर मिल सकेगी.
अभी बाकी है इंसानों पर परीक्षण
हालांकि यह तकनीक काफी उम्मीद जगाती है लेकिन अभी इसे इंसानों पर पूरी तरह टेस्ट किया जाना बाकी है. साथ ही लंबे समय तक इसके सुरक्षित और सटीक बने रहने की भी जांच जरूरी है.
हेल्थकेयर में आने वाला बड़ा बदलाव
यह नई तकनीक हेल्थकेयर के तरीके को पूरी तरह बदल सकती है. अब सिर्फ समय-समय पर टेस्ट कराने के बजाय लगातार निगरानी संभव हो पाएगी. इससे बीमारियों का जल्दी पता लगेगा, इलाज बेहतर होगा और मरीजों की सेहत में भी सुधार आएगा. यह wearable सेंसर हमें एक ऐसे भविष्य की ओर ले जा रहा है जहां इलाज ज्यादा व्यक्तिगत, सटीक और सुरक्षित होगा.
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